प्रिय देश के संपादको,
मैं संजय गिरी—आज आपसे एक साथी संपादक की तरह बात कर रहा हूँ, किसी पद की हैसियत से नहीं।
हम सब जानते हैं कि इस देश में हर संकट में सबसे आगे खड़ा कौन होता है—संपादक।
और हर संकट में सबसे अकेला कौन रह जाता है—फिर वही संपादक।
इसी अकेलेपन को खत्म करने, हमारी आवाज़ को राष्ट्रीय ताक़त देने और मीडिया की गरिमा को फिर से स्थापित करने के लिए एडिटर्स क्लब ऑफ़ इंडिया खड़ा हुआ है।
यह क्लब सिर्फ़ एक संगठन नहीं—
यह भारत का सबसे बड़ा संपादकीय आंदोलन है।
हमारी सुरक्षा, सम्मान, अधिकार और स्वतंत्रता—सबका संयुक्त मंच।
साथियों,
अगर हम एकजुट नहीं हुए तो हमारी आवाज़ बिखर जाएगी।
अगर हम संगठित हुए—तो यही आवाज़ देश की दिशा तय करेगी।
मैं आपसे कह रहा हूँ—
क्लब से जुड़ना विकल्प नहीं, आज ज़रूरत है।
अपने लिए।
अपने पेशे के लिए।
और उस लोकतंत्र के लिए, जिसकी नींव हमारी कलम पर टिकी है।
आइए—हाथ मिलाएँ,
और वह शक्ति बनें जिसकी भारत के हर संपादक को आज सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
आपका साथी,
संजय गिरी
राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष – एडिटर्स क्लब ऑफ़ इंडिया
प्रधान संपादक – Network10






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