Home » टीवी » परसो तक कर रहा था भारत समाचार चैनल के लिए रिपोर्टिंग,कल मिला आजीवन कारावास: हत्यारे पत्रकार को ‘सिस्टम’ ने पहना रखा था मान्यता का कवच

परसो तक कर रहा था भारत समाचार चैनल के लिए रिपोर्टिंग,कल मिला आजीवन कारावास: हत्यारे पत्रकार को ‘सिस्टम’ ने पहना रखा था मान्यता का कवच

91 Views

लखनऊ/फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के पत्रकारिता जगत और प्रशासनिक हलकों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब राजधानी लखनऊ में सक्रिय एक मान्यता प्राप्त पत्रकार को 17 साल पुराने सनसनीखेज हत्याकांड में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई। भारत समाचार न्यूज़ चैनल से जुड़े पत्रकार सीमाब नक़वी को फतेहपुर की जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह मामला वर्ष 2009 का है। फतेहपुर जनपद के थाना हथगांव में दर्ज मुकदमा संख्या 219/2009 एक चर्चित हत्याकांड से जुड़ा है। सीमाब नक़वी इस मामले में आरोपी थे और लंबे समय से कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। लगभग 17 साल बाद, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया।

सजा से एक दिन पहले तक फील्ड में थे सक्रिय

​हैरानी की बात यह है कि सजा सुनाए जाने के महज 24 घंटे पहले तक सीमाब नक़वी राजधानी लखनऊ में एक सक्रिय पत्रकार के रूप में फील्ड रिपोर्टिंग कर रहे थे। जैसे ही अदालत ने दोष सिद्धि के बाद सजा का एलान किया, उन्हें तुरंत न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।

​सिस्टम और संस्थान पर खड़े हुए गंभीर सवाल

​इस घटना ने उत्तर प्रदेश शासन और सूचना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं:
​मान्यता का खेल: गंभीर आपराधिक मुकदमा (हत्या) लंबित होने के बावजूद सीमाब नक़वी को उत्तर प्रदेश सरकार से ‘राज्य मुख्यालय मान्यता’ कैसे प्राप्त थी? क्या एलआईयू (LIU) और पुलिस वेरिफिकेशन में इस केस को छुपाया गया?

​न्यूज़ चैनल की भूमिका:

क्या न्यूज़ चैनल को अपने पत्रकार के आपराधिक इतिहास की जानकारी नहीं थी? सजा के दिन तक एक हत्यारोपी को संस्थान ने काम पर कैसे रखा हुआ था?
प्रशासनिक लापरवाही: एक आरोपी 17 साल तक पत्रकारिता का ‘कवच’ पहनकर सिस्टम के बीच घूमता रहा और जिम्मेदार विभाग मौन रहे।

​हलचल तेज

​फिलहाल, इस फैसले के बाद लखनऊ के पत्रकारिता गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण के बाद अब यूपी सरकार पत्रकारों की मान्यता और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच को लेकर और सख्त रुख अपना सकता है।

media4samachar
Author: media4samachar

Live Cricket

Daily Astrology